साउथ सिनेमा को बड़ा झटका: अभिनेता-निर्देशक ई. ए. राजेंद्रन का 71 की उम्र में निधन

दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री से एक दुखद खबर सामने आई है। मशहूर अभिनेता और निर्देशक ई. ए. राजेंद्रन का 71 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने कोल्लम के पट्टाथानम स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके निधन से फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

थिएटर से शुरू हुआ अभिनय का सफर
ई. ए. राजेंद्रन ने बहुत कम उम्र में ही अभिनय की दुनिया में कदम रख दिया था। स्कूली दिनों में ही उन्होंने नाटकों में भाग लेना शुरू कर दिया था। आगे चलकर उन्होंने दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से अभिनय की पढ़ाई की और प्रथम श्रेणी में स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने पुणे के फिल्म संस्थान से टेलीविजन का विशेष कोर्स भी किया, जिसने उनके करियर को नई दिशा दी।

फिल्मों में खलनायक बन बनाई अलग पहचान
राजेंद्रन ने अपने करियर में करीब 60 फिल्मों में काम किया और खासतौर पर खलनायक और सहायक भूमिकाओं के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने कई चर्चित फिल्मों में अभिनय कर दर्शकों के बीच मजबूत जगह बनाई। उन्होंने वी. आर. गोपीनाथ की फिल्म ‘ग्रीष्मम’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। हालांकि, एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें काम के अवसर कम मिलने लगे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और बाद में फिल्म ‘कलियट्टम’ से दमदार वापसी की। इसके बाद ‘प्रणयवर्णंगल’, ‘दया’ और ‘पट्टाभिषेकम’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को काफी सराहा गया।

थिएटर और प्रशासनिक जिम्मेदारियों में भी निभाई अहम भूमिका
फिल्मों के अलावा राजेंद्रन ने थिएटर में निर्देशक के तौर पर भी अपनी पहचान बनाई। वह रचनात्मक क्षेत्रों में सक्रिय रहे और स्टेट हॉर्टिकल्चर कॉर्पोरेशन के चेयरमैन के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। पारिवारिक जीवन की बात करें तो वह अपनी पत्नी संध्या राजेंद्रन को छोड़ गए हैं।

सेहत को लेकर पहले ही जता चुके थे चिंता
हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपनी सेहत को लेकर चिंता जाहिर की थी। उन्होंने बताया था कि बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उन्हें विशेष सावधानी बरतनी पड़ रही है। उन्होंने यह भी कहा था कि उनका बेटा अब अभिनय के क्षेत्र में सक्रिय है और वे एक प्रोडक्शन कंपनी भी चला रहे हैं।

27 मार्च को होगा अंतिम संस्कार
अभिनेता के पार्थिव शरीर को कोल्लम में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद उसे उनके गृह नगर त्रिशूर ले जाया जाएगा, जहां 27 मार्च को उनके पैतृक स्थान त्रितल्लूर में अंतिम संस्कार किया जाएगा।


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